Saturday, November 19, 2011

वो बचपन !

छोटी छोटी बातें, वो दिन और वो रातें..
अनजान हर डर से बेखवर थी वो मासूम चाहते...
न कोई फिकर था संग न था दिल टूटने का डर...
बस था तो आज न था कोई कल....
कोई न था ऐसा जिससे दिल दुखता था...
न रूठता था कोई हमसे न था किसी को खोने का डर...
मनचाही थी वो ज़िन्दगी, वो बचपन वो गुजरा हुआ कल...
राह में न काटें थे न थी कोई चुभन...
बेखवर थे हम था,तो बस अपनों का ही संग...
किसी अजनबी की न आहट थी न था कोई हमसफ़र...
था तो बस एक नन्हा सा बच्पन्न...
न सच था न कोई झूठ, कहलाते थे हम भगवान का स्वरुप...
हर खोफ से थे दूर साथ था बस अपनों का प्यर भरपूर...

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